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अंधश्रद्धा

का आले या  भारतातच
हे अंधश्रद्धेचे विचार 
ज्यामुळे झाले                  
अनेक जीव लाचार

सांगती ढोंगी 
झाला देवतांचा कोप
 ज्याने उडवतात ते 
लोकांची झोप 

देवाच्या नावाखाली 
मांडतात काळाबाजार 
शिक्षित असूनही लोकांना 
का पटतात  त्यांचे विचार 

भेट चढवायच्या  नावाखाली 
निर्दोष जनावरांचा देतात बळी 
अशी कशी जादू झाली 
या समजदार मनुष्या वरी 

अरे खरी भक्ती तीच
 ज्यात मनाच देवाशी कनेक्शन 
आपण    करू  या
नव्या भारताच फॉर्मेशन 

बुवा बाबांनी असे फसवले 
भोळ्या  माणसाला 
असो कितीही अवघड 
आम्ही संपवणार अंधश्रद्धेला 

     
                            प्रचिती वानखडे 
                            वर्ग - आठवा   

प्रदूषण एक शाप !

ब्रम्हाने दिले वरदान 
करा सृष्टीचे कल्याण 
पण माणसाने केला घात 
केला पृथ्वीवर  आघात 

मारले किती वनचर, जलचर 
केला नाही विचार  
या धरेचं नाही काही खरं 
माणसावर विश्वास ठेवण नाही बरं 

केले वायू  प्रदूषित 
केले किती पक्षांचे अहित 
थांबवून कितीही थांबेना 
हा माणूस काही सुधरेना 

केले पाणी सुद्धा प्रदूषित 
केले नाही कुणाचेही हित 
प्यायला राहिले नाही पाणी 
सगळ्यांची झाली आणीबाणी 

उरली आता  फक्त जमीन 
 विसरले माणुसकीला 
आता सांगा कोणी देवाला 
कंटाळलो या प्रदूषणाला 

केले पाप कापून झाड 
त्या जागी बनवलेले रोड 
केले  नाही पापाचे प्रायश्चित्त 
आता झाली ही पृथ्वी प्रदूषित 

हे ब्रह्मा ,हे  विष्णू, हे महेश्वर 
करा  कृपा माझ्या या सृष्टीवर 
द्या कडक दंड या माणसाला 
तेव्हाच  पाहू उज्वल भविष्याला 

                         श्रावणी जोशी 
                          वर्ग - आठवा 

बाबा

असा का रे बाबा तू 
कितीही थकलास तरी
का नाही रे
चिडत तू

तू तुझ्या भावना
कधीच व्यक्त करत नाहीस
तुझं माझ्यावरच प्रेम
कधीच बोलुन दाखवत नाहीस

     तुझा कुठलाही त्रास
     एक लेकच समजु शकते
     तू कितीही नाही बोललास
     तरी तुझ मन मीच वाचु शकते

तुझी शिकवण
आजही मला आठवते
तुझ्या सोबत घालवलेला प्रत्येक क्षण
मी रोजच जगत असते

     रोज येते रे बाबा
     तुझी आठवण मला
     तुझी लेक आता मोठी झाली
     हे कळलंय ना रे तुला

                         चि. मंथन मनोज गादेवार 
                         वर्ग  -  सातवा 


कोरोना तेरा आना किसी को न भाया

सब कुछ हुआ पराया- पराया ,
 तेरा आना किसी को न भाया।
 कोरोना तू कहा से आया,
 घर से बाहर सही न जाये।
सखी सहेली सब बिछड गये,
स्कूल तेरी बहुत याद सताये ।
स्कूल के दिन कब वापस आये,
क्या बताये हमने क्या- क्या खोया।
कोरोना तेरा न किसी को न भाया ,                                                                                      
नानी का घर हमें बुलाये।
शॉपिंग के लिए मन लालचाये ,
बर्थडे भी फिका पड जाये।
सब पे छाया दुःख साया,
कोरोना तेरा आना किसी को न भाया।
कोरोना तू बता हम कब स्कूल जाएंगे ,
पढ लिखकर सयाने बन जायेंगे।
हम छोटे बच्चे कैसा अपना दील बहलाए,
तेरा भय इतना सताये ।
तू कैसा बदलाव दुनिया में लाया ,
कोरोना तेरा आना किसी को न भाया।
कोरोना तुझसे अब नहीं डरेंगे हम,
हममे है तुझसे लड़ने का दम।
सोशल डिस्टेंसिंग निभायेंगे ,
हम अच्छे नागरिक बनकर दिखाएंगे।
हमने तेरी वजह से बहुत कुछ खोया ,
कोरोना तेरा आना किसी को न भाया ।
                          कुमारी-प्राजक्ता सचिन मोटाले 
                              कक्षा -५ वी ( ब )


प्यारे गुरूजन

गुरुजनों को शत- शत नमन
भिगी मिट्टी का गोला है विद्यार्थी,
आता है पाठशाला जब लेकर अपनी मंदमति
 इस मिट्टी को आकार देते है गुरूजन,
 उन गुरुजनों को मेरा शत- शत नमन ।
 वैसे तो करते है वो हमे प्यार,
पर कभी देना पड़ता है शब्दों की मार।
लेकिन मार नहीं होता है वो उनका उपकार,
जिसकी वजह से हम कर सकते है, 
अपने माता-पिता का स्वप्न साकार।
उनके उपकार का बदला चुकाना नामुमकीन है,
 ऐसे गुरुजनों को मेरा शत -शत नमन है ।
     ।। मेरा शत शत नमन है।।

				कुमारी-कनक पंकज दावडा
				कक्षा -5 वी ‘ क ’

स्कूल  हमारी खुल गई

 नाचो-गाओ धूम मचाओ, 
 स्कूल हमारी खुल गई I
 ऐसे लगा की नई ज़िंदगी,
 है, हम सबको मिल गई I
           घर बैठे २ साल से, हो रहे थे बोर,
           नही, मिलना-जुलना खेल- कूदना । 
           तो क्या करें हम और ?
 पर स्कूल शुरू अब हुई हमारी,
 मिली सहेलियाँ सबसे प्यारी I
 बहुत याद आ रही थी उनकी,
 पर  आखिर खुल गई स्कूल हमारी I
             अब हो गई स्कूल शुरू तो,
             हम अब न रूकेगे I
             न डरेंगे, पढ़-लिखकर
             साथ-साथ आगे बढ़ेंगे|I

                                 कुमारी- हर्षिका नानासाहेब देशमुख
                                 (कक्षा- पाँचवी ‘ ब )

स्वच्छ भारत : मेरे सपनों का भारत 

   ‘’  स्वच्छ और स्वस्थ होगा, तभी तो आगे बढ़ेगा इंडिया
   जन-जन तक यह संदेश पहुंचाना है, हमें स्वच्छता को अपनाना । ’’

भारत के महान व्यक्ति महात्मा गांधी ने कहा था कि, ‘’ स्वच्छता स्वतंत्रता की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण है ‘’ गरीबी , शिक्षा की कमी स्वच्छता की कमी और अन्य सामाजिक मूल्यों के कारण भारत अभी भी विकासशील देश है। हमें समाज से सभी बुरे कारणों को खत्म करने की जरूरत है। जिससे हमारे देश के विकास में रुकावट न हो । स्वच्छता विकास का दूसरा नाम है । विकास के लिए स्वच्छता पहला कदम है।  आज भारत विकास की सीढ़ियों पर चल रहा है ,और इसके लिए हमारी सरकार ने नाना प्रकार की योजनाएं चलाई है । जैसे -राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ भारत अभियान (2 अक्टूबर 2014) ऑड -इवन स्कीम (दिल्ली )और दरवाजा बंद योजना (शौचालय के लिए) हमारी सरकार कहीं पर भी 1% की भी कसर नहीं छोड़ रही गंदगी हटाने के लिए तो हम क्यों पीछे रह रहे हैं । 
स्वच्छता हमारे जीवन से कभी न हटाए जाने वाली वस्तु है हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का भी यही सपना था कि भारत विकसित कहे जाने वाले देशों की बराबर खड़ा हो सके । यदि हमारे आस-पास के वातावरण में स्वच्छता है ,साफ-सफाई है तो उस वातावरण में काम करने का भी अलग ही उत्साह, अलग ही आनंद होता है।  स्वच्छता का मतलब झाड़ू लेकर दिखावे के लिए लगाना नहीं होता बल्कि स्वच्छता का मतलब उसको अपनाना तथा उसको बनाए रखना होता है । हमें यह संकल्प लेना होगा कि हम सभी एकजुट होकर भारत में स्वच्छता लाएँगे और उसे विकसित बनाएंगे ।
                                 कुमार- पुष्कर विनोद मुराब
                                 कक्षा- नौवीं ‘ ब ’

Guatemala Collaboration

Kajal Jadhao, School of Scholars, Yavatmal

The foundation of collaborative learning is the idea that learning with others is better than learning alone. In fact, the primary goal of team-centred collaborative environment is to apply the unique backgrounds and skills that individuals bring to a group and accomplish individually. School of Scholars, Yavatmal initiated and executed a similar project where the students of the school were provided this unique and often sought opportunity through a program which focused on cultural exchange between two countries – India and America.

IX and X STD Students of School of Scholars, Yavatmal had undergone a project under collaborative learning. In this project students worked in groups. The project was carried out between the students of India and Guatemala- a country located in Central America. The main motto of the project was to exchange the thoughts, ideas, and to create an emotional global bonding.

Through this project the students of both the schools were provided a platform where they learnt about life style and schooling of the other country. The project helped the students acquire the essential skills like  creativity, persuasion, collaboration, adaptability, and emotional intelligence-  skills that demonstrate how to work with others and bring new ideas to the table.

The project aimed at developing global emotional touch through cultural exchange where students learnt about food, environment and history of independence of the other country. Educational difficulties faced by the students during pandemic was another topic of discussion in this program where the students got an opportunity to know the skills the students of the other country are using to overcome and sustain the present pandemic situation. Overall the project was a huge success where the students of both the countries were benefited to the fullest.

Janhavi S. Gawande

A space to evolve and discover our skills, a way to make ourselves realize our inner self was the collaboration with Guatemala. This collaboration helped us in many ways in fact this was an opportunity which made us go on internationally. Knowing their country was an amazing experience but then letting them know our country was fortune. We got various skills evolved, like presenting ourselves was a skill we already had but we could take it to another level. Every person walking on a road leaves its footprints similarly some experiences in our lives do so, this was that particular experience which could never be forgotten. Interacting with the teachers and the students from their country helped us put forward some ideas & made us know theirs; this exchange of ideas really deepened our sense of understanding people and made us learn the right perspective and aspect of knowing others. Our school “School of Scholars” led us on an incredible platform where we had lots of fun and enjoyed learning new things.

Moments don’t last forever but the memories do!

The few weeks with all of them will be remembered by us with the skills we evolved.

Thank you

Kashish Shah

I am very glad to share my experience of the collaboration with the school of Guatemala. From the day one, we all enjoyed the company of other students. I really appreciate the way all students had shown interest from both schools. They made us more confident to interact with the people of different countries. By making the sessions interactive both schools showed enormous cooperation and enthusiasm. Miss Rivera, the teacher of SEK Guatemala was so humble and interested to know the culture and ethnicity of our country and so were we interested to know theirs. On the very first day we came to know their culture and food habits which we enjoyed a lot, few students elaborated the idea of breakfast and lunch they have some told us about clothes. The second session was also interactive and we explained them about the culture, religions and varied food habits of our country and they were all so interested and curious to know. In the next meetings all of us explained different customs group wise. My group members were all cooperative and shown interest to know our country which made me feel that our country has an impact on the other of the world greatly. In a nutshell, the collaboration idea of the school was none other than a golden opportunity for the students of both the schools to interact with each other from opposite parts of the world. Making new friends and getting to know them and their cultures was indeed special for us. So I thank the school and management for this new idea and efforts to make it possible and the collaboration should be continued so that other students also get benefited.

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